हिन्दी की समर्पित कवयित्री.. हास्य व्ंठ
हिन्दी की समर्पित कवयित्री... हास्य व्यंग्य ...... एक दिन मैं कोई लेख लिखा था। उस लेख में एक अंग्रेजी शब्द आ गया। शुध्द हिंदी कवयित्री का मौन टूट गया क्योंकि हिन्दी उनके रग-रग में दौड़ रही थी। कई सालों से इकट्ठा ह्रदय में विष की प्याला उगल दी। बोली मैं आपको अमित्र कर रही हूं क्योंकि आपने एक अंग्रेजी शब्द का प्रयोग किया है। ऐसी विचारधारा को सुनकर मेरे हिन्दी लेखक होने का गुरूर टूट गया। मैं उस हिन्दी की देवी के सामने नतमस्तक हो गया। उस महान कवयित्री के प्रति समर्पित पाठक की तरह हो गया। ऐसी कवयित्री इस लोक में मिलना दुर्लभ है। जिसको मिल गयी हैं समझियों करोड़ो देवी-देवताओं का दर्शन मिल गया है। अमित्र करने का शब्द सुनकर गला सूख गया। फ्रीज का पानी चार गिलास पीना पड़ा। विनम्र भाव से आग्रह किया कि ऐसा मत करिये। हम अनाथ हो जायेंगें क्योंकि हिन्दी कि आप मर्मज्ञा हैं। मैंने क्षमा मांगा कि अब अंग्रेजी शब्द कभी नहीं लिखूंगा। यदि अंग्रेजी शब्द आने की संभावना होगी तो वह लेख निरस्त कर दिया जायेगा। कुछ शंका हुई तो पूछ लिया कि आपका नाम फेसबुक पर अंग्रेजी में है। हस्ताक्षर अंग्रेजी में करती है...