साप्ताहिक काव्य प्रतियोगिता- दिसम्बर 2023 रचनाकार- जयचन्द प्रजापति "जय' शहर-प्रयागराज माह- दिसम्बर सप्ताह-24-31 चतुर्थ दिनांक-24-12-2023 दिन-रविवार विषय- माँ विधा- कविता माँ वह है जो आपको पालती रहती है खुद मुसीबतों में रहकर तुम्हे बनाती रहती है माँ एक करुणा है एक गहरा सागर है जी भर निकाल सकते हैं पानी जी भर चाहे जितना माँ से लेते रहो माँ हर वक़्त तुम्हे आंचल की छांव में धूप से बचाती रहती है माँ ही होती है तेरे चेहरे पर मुश्कान हर वक़्त देखना चाहती है। कवि जयचन्द प्रजापति "जय' प्रयागराज, यूपी इमेल- jaycchand4455@gmail.com Mo-7880438226 अप्रकाशित, मौलिक
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दिसंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
जयचन्द प्रजापति "जय' की कविता
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मैं भागकर शादी कर ली ----------------- मैं भागकर शादी कर ली कोई गुनाह नहीं की माँ बाप कमा पाते थे रात को इतना खाना मिलता था बिना पेट भरे पानी पीकर भर जाती थी पेट देखा नहीं जा रहा था माँ बाप की परेशानियां शादी कर ली भागकर माँ बाप का बोझ कम कर दी उस लड़के ने कहा शादी करलो माँ बाप का बोझ मैं उठा लूंगा गरीबी में तुमने अन्त:वस्त्र कभी न खरीद सकी फटे वस्त्रों में तुम्हारा रुप धूमिल सा हो गया है मैंने भागकर इसलिए शादी कर ली कोई गुनाह नहीं की दो वक्त की रोटी नसीब कर ली माँ बाप का बोझ कम कर दी समाज की गंदी निगाहें अब घूरेगी नहीं ------कवि जयचंद प्रजापति प्रयागराज
जयचन्द प्रजापति "जय' का आलेख
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देश के महान नेता अटल बिहारी वाजपेयी ------------------------------- अटल बिहारी बाजपेयी का नाम दुनिया के इतिहास में एक ऐसा नाम था कि देशी क्या विदेशी भी नतमस्तक हो जाते थे। वही सादगीपन ,वही भारतीय संस्कृति में लिपटा यह महानायक। कुरता धोती में पूरी भारतीयता तथा राष्ट्रीयता की झलक देखने को मिलती थी। 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में एक शिक्षक घर में एक तेज आभा के एक ऐसे बालक का आगमन इस धरा पर हुआ। लोगों ने अनुमान लगा लिया था कि यह बालक एक विराट प्रतिभाशाली तथा विराट व्यक्तित्व का वट वृक्ष होगा जो मजलूमों असहायों को छत्रछाया प्रदान करेगा। इस देश व समाज के लिए सम्पूर्ण जीवन बलिदान कर जायेगा। प्रथम प्रधानमंत्री ने एक बार कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी एक बार जरूर देश का प्रधानमंत्री बनेगा। उनकी बात सत्य हुई। स्कूल में पढ़ाई के दौरान प्रभावी भाषण देते थे। बालक के अंदर गंभीर विचार बचपन में उसके रगों में प्रवाहित होने लगा था। आजादी के दौरान गांधीजी के आन्दोलन में भी सक्रियता दिखाई थी। देश के हालात को नजदीक से देखा था। कैरियर की शुरुआत पत्रकारिता से शुरू की। कुशल संपादक भी रहे। कोमल ह्रदय...
जयचन्द प्रजापति "जय' की कहानी बिटिया हुईं कामयाब'
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बिटिया हुई कामयाब ------------------------- घर में खुशियाँ मनाई गयी। मिठाइयां बांटी गयी। सोहर कराया गया। कन्या खिलाया गया। दान दक्षिणा गरीबों को दिया गया जब मुकुन्दलाल को बिटिया पैदा हुई थी। बहुत खुश थे मुकुन्दलाल। सुंदर कन्या का जन्म हुआ था। गोरी चिट्टी। मुकुन्दलाल को जैसे बहुत बड़ा खजाना मिल गया हो। सच में जब बिटिया घर में जन्म लेती है तो लक्ष्मी का आगमन होता है। कुछ लोग दबे जबान से कह डाला पराये घर की चीज होती है आज है कल किसी की अमानत हो जायेगी। चिंता करने की कोई जरूरत नहीं। कुछ लोगों को सोहर कराना गले से नहीं उतर रहा कि सोहर तो लड़के के जन्म पर होता है। कुछ तो कहे नाहक़ ही बिटिया के जन्म पर मिठाई बांटे। आखिर बिटिया की शादी ब्याह पर बहुत खर्च होता है। इस तरह मिठाई बांटना उचित नहीं। आगे चलकर बिटिया के लिए दिक्कत हो सकती है। यह सारी खुशी अपशकुन होती है लेकिन मुकुन्दलाल बेटी के जन्म पर बेहद खुश थे। अब बिटिया चार-पांच माह की हो गई है अब बिटिया मुश्कराने लगी है। ऐसी खूबसूरत बिटिया आस-पास किसी को न थी। कई बार तेल मालिश की जाती। काजल लगाया जाता है ताकि बिटिया को किसी की नजर न लगे। बि...
जयचन्द प्रजापति "जय' का लेख
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इलाहाबाद के मुक्तक सम्राट पाल प्रयागी ----- अगर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के मुक्तक रचना की बात करें तो साहित्य क्षेत्र में मुक्तक सम्राट राम कैलाश पाल प्रयागी का नाम आता है। इलाहाबाद में लिख डाला सारा मुक्तक। ऐसा साहित्य का महारथी। जगह-जगह के अनुभव के साथ मुक्तक व दोहा के लेखन में इलाहाबाद के ये साहित्यकार अपनी अलग पहचान रखते हैं। प्रादेशिक शिक्षा सेवा से सेवानिवृत्त होकर इलाहाबाद में साहित्य साधना में कर्मरत हैं। दोहा लेखन में भी सक्रिय हैं आप। एक दोहा-- हृदय प्रेम रस घोल के, तन मन सकल भिगोय। कहें गोपिका सांवरे, कहाँ गये हो खोय।। कौशाम्बी का यह कवि इलाहाबाद का हो गया। इलाहाबाद में साहित्य साधना में लीन हैं आप। एक सच्चा साहित्यकार। आपकी रचना जीवन दर्शन के साथ रची बसी हैं जो सचमुच सच्चाई बताती है। जीवन को एक राह दिखाती आपकी मुक्तक एक नयी उर्जा प्रदान करती है। इलाहाबाद की माटी सोंधी महक देने वाले आप साहित्य में एक विशालता एवं गहराई लिए हुये हैं। साधारण सादगी भरा जीवन। वही रुतबा, वही सादगी। एक गंभीर भावना। कोई ताम झाम नहीं। भारतीय संस्कृति को ...
जयचन्द प्रजापति "जय' का आलेख
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हरिवंशराय बच्चन ने लिखी इलाहाबाद में मधुशाला -------------------------- इलाहाबाद में रहकर लिख डाली मधुशाला काव्य। एक सफलता की पायदान पर हरिवंशराय बच्चन की यह महान कृति। इलाहाबादी रंग में हरिवंशराय जी ने लिखी थी। यहीं की मिट्टी में साहित्य इनके अंदर उपजा। कई रचनायें लिखी इलाहाबाद की गोद में रहकर। कई सफल रचनायें दी। प्रतापगढ़ में जन्म लेकर इलाहाबाद के कायस्थ पाठशाला से पढाई की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त कर यहीं की मिट्टी में रहकर एक से बढ़कर एक रचना दी। यहाँ की गंगा जमुनी तहजीब उनके रगो में बह रही थी। पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी कर ली थी। दूसरी शादी तेजी बच्चन से की। फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन इन्ही के पुत्र हैं। इनकी एक आत्मकथा "क्या भूलूँ क्या याद करूँ' बहुत प्रसिद्ध रही। छायावादी युग के कवि थे। इनकी कृति मधुशाला एक पापुलर कृति बन गयी। हरिवंशराय बच्चन को इस कृति से प्रसिद्धि मिल गई। कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित भी हुए। इनका निधन मुंबई में हुआ। अगर इलाहाबाद में कोई हरिवंशराय बच्चन जी को देखें हैं या मिलें हैं तो उनके विषय में जरू...
कवि व लेखक जयचन्द प्रजापति "जय' का जीवन परिचय
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हिन्दी साहित्य में एक उभरता नाम जयचन्द प्रजापति "जय' का तेजी से बढ़ रहा है। अपनी लेखनी से लोगों को अवगत करा रहे हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश प्रयागराज के हंडिया तहसील के एक छोटे गाँव जैतापुर में श्री मोतीलाल प्रजापति के घर 15 जुलाई 1984 को हुआ। शुरूआती शिक्षा गाँव में हुई। बचपन में ही पिता की मौत हो गयी। पिता की मृत्यु के बाद बालक जयचन्द प्रजापति का लालन पालन माँ शान्ती देवी के उपर आ गया। माँ के उपर मुसीबतों का पहाड़ आ गया। घर की जिम्मेदारी तथा बालक जयचन्द प्रजापति 'जय' की शिक्षा की जिम्मेदारी इनकी माँ ने उठाया। जयचन्द प्रजापति "जय' ने मीरा प्रजापति से विवाह किया। इनके चार बच्चे हैं। दो लड़के तथा दो लड़कियां हैं। बड़ी लड़की का नाम नैंसी प्रजापति तथा छोटी लड़की का नाम अन्या प्रजापति है। बड़े लड़के को ऋषभ प्रजापति तथा छोटे को सरस प्रजापति कहते हैं। कवि का परिवार गाँव में रहता है। रोजी रोटी हेतु कवि इस समय प्रयागराज में एक निजी सुरक्षा कंपनी में कार्यरत हैं। जयचन्द प्रजापति "जय' भाइयों में अकेले हैं तथा एक बहन भी है जो अब शादीशुदा जीवन जी रह...
जयचन्द प्रजापति "जय' की लघु कहानी
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एक छोटा सा गिफ्ट ------------------------ शिक्षक दिवस पर सब बच्चे अपने अध्यापक को महंगे-महंगे गिफ्ट दे रहे थे। सब बच्चे गिफ्ट लाये थे। पांचवी में पढ़ रही नेहा भी गिफ्ट लाईं थी। अपने सरजी को देना चाह रही थी पर दे नहीं रही थी। सर जी लेगें की नहीं। नेहा सिर्फ दो टाफी लाई थी। सकुचा रही थी। चेहरा उदास था। मम्मी ने पैसा नही दिये। एक रुपये कहीं गिरा हुआ पायी थी। वह जानती थी कि घर में पैसा नहीं है। एक हफ्ते से वह पैसा लिये थी कि सरजी को गिफ्ट सब देगें। मैं भी दूंगी। सब महंगे-महंगे गिफ्ट दे रहे थे। वह टाफी एक बार लेकर उठी फिर बैठ गयी। सब लोग हंसेगे। यह सोच कर बैठ गयी। फटे बैग में रख ली। उसके आंखों में आसूं थे। उस दिन घर पर खाना नहीं बना था। बेहद गरीब परिवार था। उसके पापा को काम नहीं मिल रहा था। भूख लगी थी। एक बार सोंचा टाफी खाकर भूख शान्त कर ले। नहीं-नहीं यह अपने सर जी को दूंगी। नहीं खाया। वह कभी टाफी को देखती कभी सरजी को। बहुत जतन से एक रूपये संभाल कर रखा था। सरजी ने देखा। नेहा दुखी बैठी थी। टाफियां मुट्ठी में लिये छुपा रही थी। अरे नेहा, क्या लायी हो। वह छिपाने लगी टाफियां। सर...
जयचन्द प्रजापति "जय' की कहानी" सच्चा प्रेम'
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मेरा सच्चा प्रेम पहली बार मैंने देखा उसे,तो मेरे अंदर प्रेम की आग जल गई। वह अच्छी लगने लगी थी। मेरे को भा गई । वह मेरे हृदय में धंसी चली जा रही थी। वह बैठी थी एक कुर्सी पर। एकटक मैं उसे निहारता रहा। वह सकुचा रही थी। न जाने क्यों घूर रहा है नालायक। इतना आज तक कोई नहीं घूरा। उसको थोड़ा अच्छी फीलिंग हुई। वह मधुर गति से मुश्काई। जी मेरा हरा भरा हो गया। मन मंदिर में द्वीप प्रज्ज्वलित हो उठा। भावना मेरी तीव्र गति से आगे बढ़ गई। आज मुझे महसूस हुआ कि किसी को मेरी जरूरत है जो पूर्णता की ओर बह पड़ा है। पहला एहसास गहराई तक चोट की। बहुत देर तक मैं उसे निहारता रहा। वह भी बेचारी निहारती रही। मेरा प्रेम उच्चतम स्कोर की तरफ था। मन कर रहा था कि उसको अपना बना लूँ। अपनी जिंदगी उसके साथ जोड़ दूं। पर असम्भव चीज सोंचने लगा। मैंं नालायक हूँ ऐसा सोचना मेरी मूर्खता का यह प्रमाण है। मेरा नाम सावन है। सावन की तरह हरा भरा। सदैव लोगों को खुश करने की इच्छा रहती है। मैं एक अस्पताल में काम करता हूँ। उसी अस्पताल में वह आयी थी। माँ बीमार थी। भर्ती कर रखा था। कोई नहीं था माँ ...
जयचन्द प्रजापति "जय द्वारा लिखा आलेख
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इलाहाबाद के मुक्तक सम्राट पाल प्रयागी ----- अगर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के मुक्तक रचना की बात करें तो साहित्य क्षेत्र में मुक्तक सम्राट राम कैलाश पाल प्रयागी का नाम आता है। इलाहाबाद में लिख डाला सारा मुक्तक। ऐसा साहित्य का महारथी। जगह-जगह के अनुभव के साथ मुक्तक व दोहा के लेखन में इलाहाबाद के ये साहित्यकार अपनी अलग पहचान रखते हैं। प्रादेशिक शिक्षा सेवा से सेवानिवृत्त होकर इलाहाबाद में साहित्य साधना में कर्मरत हैं। दोहा लेखन में भी सक्रिय हैं आप। एक दोहा-- हृदय प्रेम रस घोल के, तन मन सकल भिगोय। कहें गोपिका सांवरे, कहाँ गये हो खोय।। कौशाम्बी का यह कवि इलाहाबाद का हो गया। इलाहाबाद में साहित्य साधना में लीन हैं आप। एक सच्चा साहित्यकार। आपकी रचना जीवन दर्शन के साथ रची बसी हैं जो सचमुच सच्चाई बताती है। जीवन को एक राह दिखाती आपकी मुक्तक एक नयी उर्जा प्रदान करती है। इलाहाबाद की माटी सोंधी महक देने वाले आप साहित्य में एक विशालता एवं गहराई लिए हुये हैं। साधारण सादगी भरा जीवन। वही रुतबा, वही सादगी। एक गंभीर भावना। कोई ताम झाम नहीं। भारतीय संस्क...
जयचन्द प्रजापति "जय' की कहानी
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मेरा प्रथम प्रेम पत्र ---------------------- मैं बिहार का हूँ। मेरा नाम मनोहर जोशी है। प्रेम प्रसंग से सदैव दूर रहा हूँ। प्रेम की भावना कभी नहीं जगी। इस कारण पढा़ई मेरी ठीक ठाक रही। को-एजूकेेशन से दूर रहा। जब जवानी के पड़ाव में आया। हृदय में भावना उमड़ने घुमड़ने लगी। सुंदरता की तरफ आकर्षण बढ़ने लगा। स्त्री के प्रति प्रस्फुटन होने लगा। अब मैं गौर से स्त्रियों को निहारने लगा। उनके घुंघराले बालों को देखकर मन मचलने लगता। उनकी तिरछी चितवन से मन गदगद होने लगा। पड़ोसी मोहनलाल की श्रीमती कुछ मेरे लिए सही लगी। मैं सुना था प्रेम पत्र में बड़ी ताकत होती है। स्त्री चारो खाने चित हो जाती है। इस तरह से किया गया सच्चा प्रेम होता है। इसमें सच्ची तड़प होती है। मैंने प्रेम पत्र लिखने का मन बना लिया। प्रेम पत्र लिखने के लिए हिम्मत चाहिए। साहसी गुण का होना अनिवार्य तत्व है। पत्र की शुरुआत कैसे की जाय। यही सोंचने में दो दिन निकल गए। मन बहुत गिरा था। चेहरे की रौनक गायब थी। पत्र पर कहीं गलत प्रतिक्रिया आ गयी तो संभलना मुश्किल होगा। इसलिए बहुत ...
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ममता का दुख ------------------ शादी के कई साल हो गये लेकिन ममता की गोंद सुनी की सुनी रह गयी। कोई औलाद नहीं हुई। ममता फूट फूट कर कभी रोने लगती है। ईश्वर को नहीं मंजूर है कि ममता को ममता दिखाने का। आखिर शीला को सात औलाद देने की क्या जरूरत थी। एक औलाद हमारे कोख में मालिक दे देते तो क्या उनका खजाना खाली हो जाता। जब सुनती किसी को औलाद हुईं है तो हृदय बैठ जाता। वेदना की हूक उठने लगती। अश्रु प्रवाह तीव्र हो जाता। अस्त व्यस्त हो जाती। निवाला छूट जाता। हर स्त्री को मां बनने का सपना होता है। ममता बेचारी भी माँ बनने की आकांक्षा हृदय तल में संजोये है विधना उसके भाग्य में औलाद सुख नहीं लिखा है। कोई औलाद न होने पर ताना मारा जाने लगा कि यह बाझिन है। सुबह इसका मुंह देखकर उठने से पूरा दिन खराब हो जाता है। तरह तरह की बातें सुनकर ममता बेचारी का दुख और बढ़ जाता । जीवन सूना साना सा हो गया है। बहुत दवा कराया। बहुत पैसा खर्च किया गया । सब ढाक के तीन पात। औलाद जीवन के अन्तिम समय की जरूरत है इसलिए औलाद लोग पैदा करते हैं। ममता की ढलती अवस्था से समझ रही है कि अब तो औलाद का सुख संभव नहीं है। मातृ सुख क...
जयचन्द प्रजापति "जय' का व्यंग्यात्मक लेख
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व्यंग्यात्मक लेख--------- ई हमार भारतीय संस्कृति को, का होई गवा बा -------------------- हम इलाहाबाद के सिविल लाइन में थोड़ा भारतीय संस्कृति का दर्शन करने के इरादे से साइकिल से निकले तभी एक महिला फ्राक में सड़क पर घूम रही थी। हम जिज्ञासावश स्थानीय लोगों से पूछा- 'ई का है ' कुछ लोग कहे कि ई भारतीय संस्कृति है। हमार संस्कृति विकसित हो रही है। पूरा घुटने से आधा उपर तक दिख रहा है। एक ने कहा कि जो दिखता है वही बिकता है। हम शरमा गये। हम गांव के ठेठ देहाती। हम का जाने कि सिविल लाइन की भारतीय संस्कृति उपर तक विकसित हो गयी बा। छी::::छी:::; ऐसा ड्रेस पहनती है। शरम के मारे मुंह फेर लिया हमने। फैशन पूरा तन खोल देता है। आगे बढ़े तो एक लड़की दिखी जो जिन्स टी शर्ट पहने छोटा-छोटा बाल रखे मिली तो हम लड़का समझ के उसके कंधे पर हाथ रख दिये। वो भड़क गयी। अंकल जी दिखाई नहीं देता है। बीच बाज़ार में लड़कियों को छेड़ते हैं। हम मामला समझ गये। का होई गयी है अपनी भारतीय संस्कृति को। हमारा दिमाग चकरा गया। ई का देश में होई रहा है। फटहा -फटहा हम जिन्स पहने बड़े-बड़े घर के लोगों के लड़के लड़कियों को द...
जयचंद प्रजापति की कहानी
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निष्ठुर डाक्टर ---------------- रनिया के इकलौते लड़के की तबियत बहुत खराब है। बचने की कोई उम्मीद नहीं। बचने की उम्मीद किया जाये तो घर में एक पाई नहीं है। बेहद गंभीर हालत में लड़का। रनिया का आदमी लोगों के वहाँ यहाँ दौड़ दौड़ कर गया। किसी ने नहीं दिया एक पैसा। मेरा बच्चा मर जायेगा। हम अनाथ हो जायेंगे। इकलौता है। मेरे हृदय का लाल। बाबू बड़ी कृपा होगी। नहीं दूंगा पैसा तो मेरा जमीन जायदाद सब हड़प लेना। भिक्षा माँग कर खा लेंगे। टस से मस नहीं हुआ वह बाबू। करजा भर नहीं पायेगा। मर जाने दे। तेरी बीबी तो जवान है फिर पैदा कर लेगी। कर्ज से दबा आदमी उभरता नहीं है । जा बाबा घर जा। किस्मत पर सारा खेल छोड़ दे। वहाँ के मिले ताने से और कहीं नहीं गया। सीधे बेटे के पास पहुंचा। बेटे की हालत देखकर। ले भागा हास्पिटल। पचास हजार जमा करने पर ही बच्चे की भर्ती होगी। रनिया गिड़गिड़ाई ,डाक्टर साहब हमारे लाला को एक बार देख लीजिए, जीवनभर गुलामी करूँगी। रनिया का आदमी पैर पकड़ कर डाक्टर साहब से विनती की। जल्द ही दे दूंगा। बच्चे को एक निगाह से देख लीजिए। बच्चा बच जायेगा। इकलौता लाल। हाथ से नि...