जयचन्द प्रजापति जय की लघु कहानी

नानू मोची की हेल्प
______________

नानू मोची यह नहीं समझ पा रहा था कि मोहित की चप्पल बार बार क्यों टूट जा रही है। वह बार बार अपनी चप्पल बनवाने आता है। इतना गरीब मोहित नहीं है कि नई चप्पल नही ले सकता है लेकिन वही फटा पुराना चप्पल बार बार सिलवाता रहता है। हमे यह रहस्य जानना चाहिए।

मोहित एक दयालु लड़का है। लोगो की मदद करता रहता है। कोई बेहद जरूरतमंद व्यक्ति की हेल्प करने की प्लान बनाकर करता है। नानू की वह हेल्प करना चाहता है। एक दिन वह सुना। फोन पर बीबी से कहता है देर रात तक हो जाने पर बोहनी नही हुई है। लगता है आज भी सब्जी नहीं ले पाऊंगा। आज भी सूखे ही खाना पड़ेगा।
  
पास में मोहित वही खड़ा सुन रहा था कि आज नानू मोची सूखी रोटी खायेगा। कोई आज नही आया। हे भगवान ! कब तक ऐसे दिन देखने को मिलेगा। मोहित ने देखा बेचारा बहुत दुखी है।आज उसके बच्चे सूखी रोटियां ही खाकर रहेंगे। नही मुझे हेल्प करनी चाहिए। 

वह अपनी चप्पल तोड़ कर उसके पास गया और बनाने के लिए कहा। नानू बहुत खुश हुआ की आज भगवान ने प्रार्थना सुन ली। मोहित ने सौ का नोट दिया। फुटकर नही है क्या ? नानू ने कहा। मोहित ने कहा पूरे पैसे रखो। नानू बहुत खुश हुआ।

इस तरह जब भी नानू के पास कोई ग्राहक नहीं आते तो मोहित चप्पल तोड़कर सिलवाया और नानू की हेल्प किया करता। एक दिन मोहित ने चप्पल बनवाया था लेकिन ग्राहक न आने के कारण दूसरे दिन उसने चप्पल तोड़ कर नानू के पास गया। नानू को कुछ गड़बड़ दिखा। साहब से जिद करके पूछने लगा।

कुछ नही बस टूट गया। चप्पल बना दो। नहीं साहब , पहले बताओ जिद करने लगा। देखो नानू आज कोई ग्राहक तुम्हारे यहां नहीं आया।आज तुम्हे और तुम्हारे परिवार को भूखे सोना पड़ेगा। एक दिन तुम घर पर फ़ोन से बात कर रहे थे मैंने सब सुन लिया था। नई चप्पल मैंने तोड़ डाली। मैं पैसा तुम्हे वैसे दे देता लेकिन तुम स्वाभिमानी हो पैसा नही लेते इसलिए चप्पल तोड़ दिया था ताकि तुम्हे यह रहे कि तुम अपने मेहनताना के रूप में लिए हो। जब भी मैं सुनता या देखता अपनी चप्पल तोड़ कर हेल्प तुम्हारी करता ताकि तुम तुम्हारे बच्चे भूखे न रहे। 

आज भी कोई ग्राहक नहीं आया। इसलिए मैं अपनी चप्पल तोड़ डाला। नानू के आंखो से आंसू छलक पड़े। फफक फफक कर रो पड़ा। मोहित की इस सहयोग से मोहित के प्रति कृतज्ञता दर्शाया। अपने बुरे दिन के विषय में सोचते हुए चप्पल बनाने लगा। ह्रदय मन से मोहित को आशीर्वाद दे रहा था मोहित भी खुश है की आज भी नानू को सूखे नही खाना पड़ेगा।

                           जयचन्द प्रजापति 'जय'
                               Prayagraj

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कवि व लेखक जयचन्द प्रजापति "जय' का जीवन परिचय

जयचन्द प्रजापति "जय' की कहानी बिटिया हुईं कामयाब'

जयचन्द प्रजापति "जय' का लेख