लघुकथा

पत्नी में हुआ बदलाव
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सूरजमणि एक मध्यवर्गीय परिवार से है। कमाता है फिर खाता है। ईमानदार है। कम भले कमाता है लेकिन किसी का गिरवी नहीं है। अपने बच्चों तथा पत्नी पर जितना हो सके खर्चा करता है जितना होना चाहिए खर्च उतनी आमदनी नही है बेचारे के पास। पत्नी तथा बच्चे उसकी आमदनी से खुश नहीं है। कमाई के हिसाब से पूरा खर्चा नही हो पाता है। पत्नी को अच्छी साड़ी चाहिये। बच्चों को अच्छा स्कूल चाहिए। अच्छा खाना होना चाहिए। फल फूल होना चाहिए। इन सबके न होने से पत्नी ठीक से सूरजमणि से बात नहीं करती है। उसका अपमान ही करती थी लेकिन सूरजमणि हर जरूरत की चीजे लाता था। पत्नी द्वारा अपमान किये जाने से बेचारा सदमे में है। 

चाय नहीं है,बेचारा चायपत्ती लेने दौड़ा जाता। सब्जी नहीं है। भागा जाता सब्जी मंडी। बेटे की अचानक तबीयत खराब हो गयी । दौड़ कर हास्पिटल ले भागा। दवा के लिए पैसे नहीं थे। उधार लेने चचा के घर भागा। नून तेल से लेकर जूता चप्पल"। कपड़े साबुन सोडा। पत्नी को सजाकर रखने की चाहत में क्री'म पाउडर की कमी नहीं होने देता। कल ही उसने लिपिस्टिक न"हीं लगाई थी। बेचारा दौड़ कर मार्केट गया। पत्नी को लिपिस्टिक दिया। पत्नी की एक ख्वाहिश थी कि उसका पति झुमका दे लेकिन गरीबी मुफलिसी में बेचारा एक पाई नहीं बचा पाया। पत्नी के ताने से बेचारा बहुत दुखी है। ड्यूटी की छुट्टी न हो बेचारा बिना खाये ड्यूटी पहुँच गया। गरीबी से संघर्ष करता युवक पत्नी के बार बार उलाहना से न हंंस रहा है न तो रो पा रहा है। पत्नी के इस व्यवहार से तंग आ गया है। वह जानता है जिस दिन हाथ खड़े कर दूंगा। सब समझ में आ जायेगा। 

आखिर पत्नी को सबक सिखाना चाहता था। अचानक बीमार होने का बहाना बना लिया। बिल्कुल सुस्त हो गया। आंखे एकटक कर लिया। खाना पीना छोड़ दिया। अब घर के हालात बहुत खराब हो गयी। कौन इलाज के लिए अस्पताल जाये। घर में खाने के लिए कुछ नहीं है। कौन मार्केट जाये। कौन बच्चों के लिए सामान लाये। कौन दवा लाये। उसके खराब व्यवहार से पड़ोसी भी हाथ खड़े कर लिये। अब उसको अपने पति की जरूरत महसूस होने लगी। पति की वजह से आराम से जीवन गुजर बसर हो रहा था। अब उसे अगर जरूरत थी पति की। वह इस चीज को समझी की पति ही वह चीज जिसके वजह से मैं बोल लेती है। उनके बीमार हो जाने से भूखों मरने की स्थिति हो गयी। 

वह पति की लगी सेवा करने। भगवान से प्रार्थना शुरू कर दिया कि मेरे पति को बचा लीजिए भगवान। नहीं तो जीते जी हम अनाथ हो जायेंगे। हमारे बच्चे बिन बाप के हो जायेंगे। पत्नी पहुँच कर पति के पास मांफी मांगा। कहा कि मैं आप का बहुत दिल दुखाती थी। हमें माफ कर दो। हमारी जो खुशी है वह आपके मेहनत से मिलती है। आज मैं समझी कि आपके बीमार हो जाने से घर में खाना नहीं बन सका। भूखों रहना पड़ा। हमारी जिह्वा अनाथ सी हो गयी। मेरे अंदर जो ताकत है। वह पति की वजह से है। पति धीरे- धीरे ठीक होने लगा। घर में खुशियाँ लौट आयी। उस दिन से उस घर में कलह समाप्त  हो गया। सूरजमणि का प्रेम पत्नी के इस व्यवहार से दुगुना हो गया। उसने अपनी मेहनत बढ़ा दी। जल्दी ही पत्नी को झुमका बनवा कर दिया। पति पत्नी को उलझ कर रहने से विकास नहीं होता है। सुलझ कर रहने से संपूर्ण विकास होता है। 

                     ..जयचंद प्रजापति "जय' प्रयागराज

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