रवींद्र कालिया
रवींद्र कालिया मिस्री की तरह चखते थे इलाहाबाद को
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जालंधर मे पैदा हुए रवींद्र कालिया इलाहाबाद की रोजी रोटी इस कदर भा गई कि यह कहानीकार यही रुक गया।सब जगह गए लेकिन इलाहाबाद की तहजीब यहां की रंगीनियत में इस कदर जम गए कि इलाहाबाद मिस्री की तरह चखते रहे। इलाहाबादी चाल ढाल में रच बस गए।
हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार, उपन्यासकार, संस्मरणकार थे। वे कहानियों में जो भाव भर देते थे की पाठक पढ़ते पढ़ते इतना तल्लीन हो जाता था कि ऊबता नहीं था।
सच में एक साफ दिल के इंसान थे। लोगो को जोड़ कर रखते थे। व्यंग्य भी लिखा। लघु कहानी भी लिखा। इलाहाबाद प्रेस की स्थापना की। इस तरह से इलाहाबाद की माटी में खुशबू को बिखेरते रहे। वागर्थ का भी जिम्मा संभाला। नया ज्ञानोदय को नई ऊंचाई दी।
प्रसिद्ध कहानीकार ममता कालिया से शादी की। आज के दिन ९ जनवरी को दिल्ली में इनका निधन हो गया था। आज इनकी पुण्यतिथि है। महान साहित्यकार से अगर आपकी मुलाकात हुई हो तो जरूर कुछ संस्मरण बताइए ताकि उनकी यादें कुछ और ताजा हो जाए। महान साहित्यकार को नमन करता हूं।
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