हरिलाल पत्नी के भक्त हैं हरिलाल हनुमान के बहुत भक्त आदमी थे, भक्ति उनके पोर पोर में बसी थी। हनुमान चालीसा का पाठ स्नान ध्यान के बाद रोज नित करते। भाव विभोर होकर चालीसा पाठ करते, उस वक्त किसी का फोन आ जाता तो खिसिया जाते थे।मोहल्ले में सब लोग जान गये थे कि हरिलाल हनुमान के बहुत बडे भक्त हैं। चालीसा पाठ के समय किसी की दखल को बर्दाश्त नहीं करते। गुस्सा सातवें आसमान तक पहुंच जाता।हमें भी इनकी भक्ति पर गर्व था। पूजा पाठ के समय हम इनसे बात नहीं करते थे। एक दिन पूजा पाठ कर रहे थे उस समय उनके आस पास कोई नहीं था। पत्नी उनकी रसोईं में थी। हरिलाल पूजा करते समय पत्नी से कह रहे हैं कि मेरा खाना निकाल दो ठंडा होता रहे पूजा करके आ रहा हूं।इनकी भक्ति पर शक हुआ कि हनुमानजी की पूजा करते समय खाना निकलवा रहे हैं। एक दिन देखा कि पूजा करते समय पत्नी से बतिया रहे थे। हमको देखा तो जोर जोर से चालीसा पाठ करने लगे। एकाग्र मुद्रा में हो गये।एक दिन इनकी पत्नी मायके गयी थी। हरिलाल पूजा पाठ कर रहे थे। कई फोन आया किसी का उठाया नहीं। उसी समय इनकी पत्नी महोदया का फोन आ गया। पूजा पाठ बंद। जम गये बतियाने में। आधा घंटा तक वार्तालाप हुई। पूजा पाठ की ऐसी तैसी हो गयीहम समझ गये कि हरिलाल हनुमान भक्त कम पत्नी भक्त ज्यादा हैं। इस तरह हनुमान भक्ति पर हरिलाल को संदेह की दृष्टि से देखने लगा। जयचन्द प्रजापति 'जय' प्रयागराज

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