आदत है रोज मांगने की
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बेहद कमजोर, हिलते हाथ, चेहरे की झुर्रियां, कांपती आवाज में एक भिक्षुक ने जाते हुये पति पत्नी को हाथों से इशारा कर कुछ खाने के लिये संकेत करते हुये कुछ खाने की मांग। दयावान पत्नी ने पति को कुछ सहायता करने की बात कही।

पति मुश्कराया। इनकी आदत है रोज मांगने की कहकर स्कूटी स्टार्ट की। जल्दी पत्नी को बैठने के लिये कहा। जाते वक्त पत्नी मुड़ कर भिक्षुक को देखती रह गयी जब तक वह भिक्षुक आंखों से ओझल नहीं हो गया। 

पत्नी यही सोंचती जा रही थी.. इनकी आदत है रोज मांगने की। पत्नी यह भी सोंच रही थी कि अगर कोई इनका होता तो रोज मांगने की आदत नहीं होती।

                           ..... जयचन्द प्रजापति 'जय'
                                      प्रयागराज

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