वकील साहब का सच
वकील साहब बहुत सरल स्वभाव के दिखे। चेहरे पर एक चमक, एक विशाल व्यक्तित्व के स्वामी दिखे। ईमानदारी उनकी जैसे जेब में है। सादगी के प्रतीक लग रहे थे। कानून के ज्ञाता, कोई कानून में पराजित नहीं कर सकता। गरीबों को कानूनी सहायता करने वाले दिखे।
मोटी फीस न जमा करने के कारण मुरारी का केस लड़ने से मना कर दिया। जो कुछ मुरारी ने पैसे की व्यवस्था की थी उसने पत्नी के गहने बेंचे थे। जैसा वकील साहब दिखे वैसा सच में मुरारी के गिड़गिड़ाने पर पिघले नहीं।
......जयचन्द प्रजापति जय
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